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बागपत के एक सामान्य से मोहल्ले में स्थित मंजू मेकओवर प्रशिक्षण केंद्र से जब रोज़ दर्जनों लड़कियाँ सीखने आती हैं, तो वे केवल मेकअप ब्रश और हेयर ड्रायर नहीं चलाना सीखतीं—वे अपने सपनों को आकार देना भी सीखती हैं। यही सपना देखा था प्रियंका और नेहा ने, जब वे इस केंद्र से जुड़ीं। घर की सीमित आर्थिक परिस्थितियों, पारिवारिक ज़िम्मेदारियों और सामाजिक दबावों के बीच दोनों बालिकाओं ने यह ठान लिया कि वे खुद को सिर्फ सजाने-संवारने का हुनर ही नहीं, बल्कि स्वावलंबन का रास्ता भी सीखेंगी। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें न केवल तकनीकी कौशल सिखाया गया, बल्कि व्यक्तित्व विकास, ग्राहक संवाद, और स्वरोजगार के गुर भी बताए गए। प्रशिक्षण के कुछ महीनों बाद प्रियंका ने अपने घर के एक कमरे को पार्लर में बदला, वहीं नेहा ने मोबाइल ब्यूटी सर्विस शुरू की, जिसमें वे ग्राहकों के घर जाकर सेवाएँ देने लगीं। उनकी मेहनत और समर्पण रंग लाया — ग्राहक बढ़े, आमदनी हुई, और सबसे बढ़कर — आत्मसम्मान की चमक उनके चेहरे पर साफ़ दिखने लगी। अब ये दोनों न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, बल्कि वे अपनी तरह की दूसरी लड़कियों को भी प्रेरित कर रही हैं। वे बताती हैं, “हमें सिर्फ मेकअप ही नहीं सिखाया गया, बल्कि यह भी सिखाया गया कि खुद को कैसे खूबसूरत महसूस कराना है — आत्मनिर्भर बनकर।” आज मंजू मेकओवर सिर्फ एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि यह उन सपनों की ज़मीन है, जहाँ हर लड़की यह विश्वास लेकर आती है — मैं भी कर सकती हूँ।